Sunday, July 11, 2021

 

पहाड़ी बादल

घरों में घुस आते बादल

धुओं में छिप जाते बादल

मगर ये बादल वो बादल तो नहीं हैं

जो इतराते हैं इठलाते हैं

आसमां में टंगे हुए हमें चिढ़ाते हैं

ये तो पहाड़ी बादल हैं

जो बड़े ही मिलनसार हैं

राह चलते मिल जाते हैं

गले से लग ,घुल –मिल जाते हैं

इनका कोई ठिकाना नहीं हैं  

बड़े घरों में भी आना-जाना नहीं हैं

यों ही आवारा हैं फिरते

घूमते गाते चलते विचरते

कहीं भी कभी भी आ जाते हैं

खिड़की ,दरवाजों ,सुराखों में समां जाते हैं

बड़े ही बेतकलुफ्फ़ मिज़ाज ये बादल

घरों में घुस आते बादल

धुओं में छिप जाते बादल |

n  अमित