एक दिन एक अनोखी भावना मन में आई
कैसे करूँ मैं देश-प्रेम ?
इस बात ने मन में ली अंगडाई
क्या किया जाये ?
क्या करा जाये ?
किसके खिलाफ करूँ संघर्ष ?अब तो कोई अँगरेज़ नहीं !
किसके खिलाफ लगाऊ नारे ?, जब मन में कोई विद्वेष नहीं !
या भर्ती हो जाऊ सेना में , दिन-रात करू मैं जंग
या बन जाऊ महान खिलाड़ी , पर मन में नहीं उमँग !
या बन जाऊ क्रांतिकारी , ताकि काँप उठे भ्रष्टाचारी
या हो जाऊ एक संत , और खत्म करूँ दुनियादारी
समय कम है काम बहुत है , और नहीं कोई दिशा-ज्ञान
इस भाग-दौड की जिंदगी में ,कैसे बनूँ मैं देश-प्रेमी महान ?
इन्ही विचारों की पोटली लिए , मैंने दिन कई सारे काट दिए
जब कोई किनारा नहीं दिखा , तो मैंने अपने दिल से पूछा
देश क्या है ? क्या है देश ?
एक मिटटी का टुकड़ा ,जो कही है फैला कही हैं सुकुडा.
क्या है देश ? देश क्या है ?
मेरे दिल ने मुझे कहा
देश है पर्वत , देश है नदिया , देश है सागर
देश है कहानी , देश है कविता , देश हैं मिटटी की गागर
देश है संस्कृति , देश है सभ्यता ,देश है अनेकता में एकता
देश है लोग ,और देश है लोगो का प्यार
देश है शान्ति, देश है उन्नति ,देश है मन निर्विकार
देश सभी में रचता-बसता , जो कुछ उससे जुड़ा हुआ
देश अदभुत इश्वर हैं जो सबकी ओर मुड़ा हुआ
मैंने फिर अपने दिल से प्रशन किया . तो कैसे करूं मैं देश प्रेम ?
मेरे दिल ने मुझे कहा -
आज थोडा कम पानी बहाना ,आज हेलमेट पहन के जाना
आज गाडी क्रोसिंग के पीछे कड़ी करना ,आज सीढयों पर मत थूकना
आज रोटी मत फेकना ,आज किसी बुजुर्ग को सीट दे देना
आज अपने गुरु को मन से नमस्कार करना ,आज एक बच्चे को हंसकर गोद में ले लेना
आज अपने नौकर से हंसकर बोलना ,आज एक शहीद की मूर्ति को सलाम करना
और अंत में खूब करो मेहनत ,और खूब कमायो यश और धन
तुम बढ़ोगे तो देश बढ़ेगा ,ये कहता मैं कर नमन
दिल के ये सारी बातें सुनकर , मुझे बहुत आश्चर्य और संतोष हुआ
की मैंने जाना देश-प्रेम करना हैं कितना सरल
हर कोई कर सकता है देश-प्रेम ,यदि मन में हो भावना प्रबल
– अमित गुप्ता