Wednesday, February 9, 2011

सम्मान



अनगिनत इच्छाओं  का  देवता हैं सम्मान
नित नयी तृष्णाओं को उभारता है सम्मान
शिखरों की निवासी अनंतकालीन शुन्यता है सम्मान

सुधा है देवताओं के लिए
शिव के लिए विष-पान है सम्मान

प्रेम-रहित प्रेमियों का विवशतापूर्ण सहचर्य है सम्मान
रात्रि के आठवे पहर में सिसकते पुरुष का क्रंदन है सम्मान
महानायकों के अश्रु जो कभी देख न पाए, वो नेत्र हैं सम्मान

दशरथ के लिए है संगिनी प्रेम
राम के लिए वनवास है सम्मान

सागरों के बीच जो करे भ्रमित ,ऐसी मृग तृष्णा है सम्मान
आधी अधूरी पिलाकर जो मुक्त करे साथी ,वो मदिरापान है सम्मान
नतमस्तक ही हो गए सब तो कैसे हो आलिंगन , ऐसा व्यवधान है सम्मान

रणनीतिज्ञो के लिए है विजय -पराजय 
योद्धाओं  के लिए बलिदान है सम्मान ! 

                                                   - अमित गुप्ता