Saturday, May 15, 2010

ऑरकुट और फेसबुक


मैं नहीं जानता मित्र पड़ोसी
क्योंकि मैं बात ना उनसे करता हूँ
जो मैं करता वह हैं ऑरकुट और फेसबुक
मैं इन्हीं पर जीता मरता हूँ

मिनटों में बन जाये मित्र ,जैसे क्रिकेट में बनते रन
फोटो देखो ,विडियोदेखो ,जितना चाहें लूटो फन

विजिट करो चाहें जिसे , भले ना हो कोई जान - पहचान
जितने ज्यादा को  ऐड करो , उतना ज्यादा  होता सम्मान

खूब करो स्क्रैप ,और खूब करो तुम ट्वीट
जिसकी चाहे ‌‍‍'वाल पर लिखो ,कोई सके ना पीट

विजिबल होते भी इनविजिबल हो जाओ, अवेलवल होते हुए भी बिजि
पल भर में ‘स्टेट्स’ पता चले ,की ‘सिंगल’ हैं वो ,या कहीं लगी

           ‘फार्मिंग’ करूँ , चारा खिलाऊँ , ‘स्कोर’ बनाऊँ मोर एंड मोर
अब मत कहो मुझे आलसी निक्कमा ,बंद करो यह शोर

मुझसा कौन वीर होगा ,कौन करे मुझसा उपकार
‘वैम्पायरो’ का खून पियूँ मैं , और करूँ ‘माफिया – वार’

जुड़ना चाहता हूँ मैं दुनिया से ,’ग्लोबलाइज़ेशन’ का हैं फैशन
आस पड़ोसी ,मित्र – संबंधी इन सब से मैंने तोड़ा बन्धन
  
ऑरकुट ,फेसबुक और ट्वीटर हैं मेरा पहला - पहला प्यार
गुप्ता जी ,शर्मा जी और शुक्ला जी को मेरा अब दूर से नमस्कार

मुझे चाहिए ‘फैंस’ ,’फ़्रेंड्स’ और ‘स्क्रेप्स’ रोजाना
प्रेम ,मोहब्बत और सहानुभूति सब ‘ऑनलाइन’ ही बतलाना

खेलों के मैदान भुला मैं , छोड़ा मैंने बाहर-भीतर जाना
इसीलिए चाहों तो आ जाना , ऑरकुट और फ़ेसबुक मेरा ठिकाना
                                            
                           रचियता   -अमित गुप्ता