मैं नहीं जानता मित्र पड़ोसी
क्योंकि मैं बात ना उनसे करता हूँ
जो मैं करता वह हैं ‘ऑरकुट’ और ‘फेसबुक’
मैं इन्हीं पर जीता मरता हूँ
मिनटों में बन जाये मित्र ,जैसे क्रिकेट में बनते रन
‘फोटो’ देखो ,’विडियो’ देखो ,जितना चाहें लूटो ‘फन’
जितने ज्यादा को ‘ऐड’ करो , उतना ज्यादा होता सम्मान
खूब करो ‘स्क्रैप’ ,और खूब करो तुम ‘ट्वीट’
जिसकी चाहे 'वाल’ पर लिखो ,कोई सके ना पीट
पल भर में ‘स्टेट्स’ पता चले ,की ‘सिंगल’ हैं वो ,या कहीं लगी
‘फार्मिंग’ करूँ , चारा खिलाऊँ , ‘स्कोर’ बनाऊँ मोर एंड मोर
अब मत कहो मुझे आलसी निक्कमा ,बंद करो यह शोर
मुझसा कौन वीर होगा ,कौन करे मुझसा उपकार
‘वैम्पायरो’ का खून पियूँ मैं , और करूँ ‘माफिया – वार’
जुड़ना चाहता हूँ मैं दुनिया से ,’ग्लोबलाइज़ेशन’ का हैं फैशन
आस पड़ोसी ,मित्र – संबंधी इन सब से मैंने तोड़ा बन्धन
ऑरकुट ,फेसबुक और ट्वीटर हैं मेरा पहला - पहला प्यार
गुप्ता जी ,शर्मा जी और शुक्ला जी को मेरा अब दूर से नमस्कार
मुझे चाहिए ‘फैंस’ ,’फ़्रेंड्स’ और ‘स्क्रेप्स’ रोजाना
प्रेम ,मोहब्बत और सहानुभूति सब ‘ऑनलाइन’ ही बतलाना
खेलों के मैदान भुला मैं , छोड़ा मैंने बाहर-भीतर जाना
इसीलिए चाहों तो आ जाना , ऑरकुट और फ़ेसबुक मेरा ठिकाना
रचियता -अमित गुप्ता